home

search

ETYETRIGW

  -·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ㄖ  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  尺  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ㄒ  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  卄  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ?  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  乇  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ㄒ  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ㄒ  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  丨  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  几  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ?  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ㄥ  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ㄖ  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  丂  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ㄒ  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  丨  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  几  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ··--··  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ?  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ㄖ  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ㄥ  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  丨  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ?  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  乇  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  卂  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  几  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ?  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  匚  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ㄖ  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  几  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  千  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  乇  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  丂  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  丂  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ㄒ  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  卄  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  卂  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ㄒ  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  丨  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ·----·  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ?  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  乇  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ㄥ  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ㄖ  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  丂  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ㄒ  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  爪  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ㄚ  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  乇  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  卂  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  尺  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  丂  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ㄒ  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ㄖ  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ㄚ  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ㄖ  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ㄩ  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  --··--  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ㄒ  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ㄖ  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  尺  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  乇  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ?  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  卂  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  丨  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  几  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ㄚ  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ㄖ  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ㄩ  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  尺  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  卄  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  乇  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  卂  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  尺  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ㄒ  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  山  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  卂  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  几  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  丨  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  几  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ?  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  卂  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  乃  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ㄖ  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ?  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  乇  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----· . ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ㄒ  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  卄  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  尺  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  乇  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  乇  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  爪  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ㄖ  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  几  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ㄒ  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  卄  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  丂  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  卂  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  几  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ?  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ㄒ  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  卄  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  乇  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  几  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  卂  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ?  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ㄖ  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----· . ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  丨  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  千  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  乇  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  乇  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ㄥ  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  丨  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ㄒ  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  爪  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ㄩ  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  丂  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ㄒ  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  乃  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  乇  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ?  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  尺  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ㄖ  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  山  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  几  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  丨  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  几  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ?  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  爪  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  乇  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----· . ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ㄒ  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  卄  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  乇  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  山  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  卂  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ㄒ  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  匚  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  卄  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  千  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ㄩ  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  ㄥ  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  乃  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  卂  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·  几  ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---·· -···· ····· ----·   ----· ---·· ····· ---·· -···· ····· ····· -···· ---·· -· · ·-- ·-·· ·· -· · - --- -·- · -· ----· ---·· --··· ····· ---··

  Unauthorized reproduction: this story has been taken without approval. Report sightings.

Recommended Popular Novels